यह ब्लॉग खोजें

फ़ॉलोअर

31 जुलाई, 2010

"गैस सिलेण्डर" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


गैस सिलेण्डर कितना प्यारा।
मम्मी की आँखों का तारा।।
रेगूलेटर अच्छा लाना।
सही ढंग से इसे लगाना।।

गैस सिलेण्डर है वरदान।
यह रसोई-घर की है शान।।

दूघ पकाओ, चाय बनाओ।
मनचाहे पकवान बनाओ।।

बिजली अगर नही है घर में।
यह प्रकाश देता पल भर में।।

बाथरूम में इसे लगाओ।
गर्म-गर्म पानी से न्हाओ।।

बीत गया है वक्त पुराना।
अब आया है नया जमाना।।

कण्डे, लकड़ी अब नही लाना।
बड़ा सहज है गैस जलाना।।

किन्तु सुरक्षा को अपनाना।
इसे कार में नही लगाना।
(चित्र गूगल सर्च से साभार)

7 टिप्‍पणियां:

  1. सराहनीय व सार्थक प्रस्तुती ...

    जवाब देंहटाएं
  2. बहुत ही सुन्दर संदेश देता बाल-गीत्।

    जवाब देंहटाएं
  3. अच्छे विषय पर आपने ध्यान दिलाया है बच्चों को गीत के साथ साथ जानकारी भी दे दी| बधाई

    जवाब देंहटाएं
  4. सुन्दर बाल गीत ...सावधानी को भी बताता हुआ ..

    जवाब देंहटाएं
  5. मुझे तो बहुत पसंद आया ये गीत....

    जवाब देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।