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07 अक्तूबर, 2013

"आयी रेल" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मेरी बालकृति नन्हें सुमन से
 एक बालकविता
"आयी रेल"

धक्का-मुक्की रेलम-पेल।
आयी रेल-आयी रेल।।

इंजन चलता सबसे आगे।
पीछे -पीछे डिब्बे भागे।।
हार्न बजाता, धुआँ छोड़ता।
पटरी पर यह तेज दौड़ता।।

जब स्टेशन आ जाता है।
सिग्नल पर यह रुक जाता है।।
जब तक बत्ती लाल रहेगी।
इसकी जीरो चाल रहेगी।।
हरा रंग जब हो जाता है।
तब आगे को बढ़ जाता है।।

बच्चों को यह बहुत सुहाती।
नानी के घर तक ले जाती।।
छुक-छुक करती आती रेल।
आओ मिल कर खेलें खेल।।
धक्का-मुक्की रेलम-पेल।
आयी रेल-आयी रेल।।

4 टिप्‍पणियां:

  1. बढ़िया प्रस्तुति-
    आभार आदरणीय-
    नवरात्रि की शुभकामनायें-

    जवाब देंहटाएं
  2. आदरणीय सर प्रणाम, आपको सुन्दर बाल रचना की बधाई !

    जवाब देंहटाएं
  3. आपकी इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल मंगलवार ८ /१०/१३ को चर्चा मंच पर राजेश कुमारी द्वारा की जायेगी आपका वहां हार्दिक स्वागत है ।

    जवाब देंहटाएं

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