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24 नवंबर, 2013

"सीधा प्राणी गधा कहाता" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मेरी बालकृति नन्हें सुमन से

एक बालकविता
"सीधा प्राणी गधा कहाता"


कितना सारा भार उठाता।
लेकिन फिर भी गधा कहाता।। 
farmer-donkey-1रोज लाद कर अपने ऊपर, 
कपड़ों के गट्ठर ले जाता। 
वजन लादने वाले को भी, 
तरस नही इस पर है आता।। 
donkey -3जिनसे घर में चूल्हा जलता, 
उन लकड़ी-कण्डों को लाता। 
जिनसे पक्के भवन बने हैं, 
यह उन ईंटों को पहुँचाता।। 
donkey_11यह सीधा-सादा प्राणी है, 
घूटा और घास को खाता। 
जब ढेंचू-ढेंचू करता है, 
तब मालिक है मार लगाता।। 

सीधा प्राणी गधा कहाता,
सिर्फ काम से इसका नाता।
भूखा-प्यासा चलता जाता। 

फिर भी नही किसी को भाता।। 

3 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत प्यारी-भोली रचनाये आपकी लेखनी के कमाल हैं. बच्चों के मनभावन विषयों पर रोचक भी है. जितनी तारीफ़ की जाये कम है.

    जवाब देंहटाएं
  2. मित्र ! प्रात:कालीन प्रणाम !
    गधे के बहाने समाज के शोषण का विवरण | बहुत खूब !!

    जवाब देंहटाएं
  3. बढ़िया प्रस्तुति-
    आभार आदरणीय-

    जवाब देंहटाएं

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