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17 मई, 2014

"बिल्ली मौसी क्यों इतना गुस्सा खाती हो" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मेरी बालकृति "नन्हें सुमन" से

एक बाल कविता
"बिल्ली मौसी क्यों इतना गुस्सा खाती हो"

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बिल्ली मौसी बिल्ली मौसी, 
क्यों इतना गुस्सा खाती हो। 
कान खड़ेकर बिना वजह ही,  
रूप भयानक दिखलाती हो।। 

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मैं गणेश जी का वाहन हूँ, 
मैं दुनिया में भाग्यवान हूँ।।  
चाल समझता हूँ सब तेरी, 
गुणी, चतुर और ज्ञानवान हूँ। 

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छल और कपट भरा है मन में, 
धोखा क्यों जग को देती हो? 
मैं नही झाँसे में आऊँगा, 
आँख मूँद कर क्यों बैठी हो?

1 टिप्पणी:

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