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20 मई, 2010

“तितली रानी” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

"नन्हे सुमन का 50वाँ पुष्प"


तितली रानी, तितली रानी!
तुमने क्या है मन में ठानी!!


उड़कर दूर देश से आई!
लगता है लग गई थकाई!!


सुस्ताने को हाथ मिला है!
मुझे तुम्हारा साथ मिला है!!
IMG_1197तुम रंगों का भरा समन्दर!
पंख तुम्हारे लगते सुन्दर!!


चलो तुम्हें मैं ले जाता हूँ!
थोड़ा पानी पिलवाता हूँ!!


ताजादम जब हो जाओगी!
पंख हिलाती उड़ जाओगी!!

12 टिप्‍पणियां:

  1. उम्दा प्रस्तुती और तस्वीर / सराहनीय कविता /हम चाहते हैं की इंसानियत की मुहीम में आप भी अपना योगदान दें / पढ़ें इस पोस्ट को और हर संभव अपनी तरफ से प्रयास करें http://honestyprojectrealdemocracy.blogspot.com/2010/05/blog-post_20.html

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  2. नन्हे सुमन के पचासवें पुष्प के लिए बधाई ...

    और कविता तो हमेशा की तरह बहुत प्यारी है...

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  3. इस कविता में निहित हितकारी भावनाएँ
    इसको उच्च स्थान दिलाने में सक्षम हैं!
    --
    बौराए हैं बाज फिरंगी!
    हँसी का टुकड़ा छीनने को,
    लेकिन फिर भी इंद्रधनुष के सात रंग मुस्काए!

    जवाब देंहटाएं
  4. और हाँ ... ... .
    नन्हे सुमन के इक्यावनवें सुमन के लिए
    आपको बहुत-बहुत बधाई!

    जवाब देंहटाएं
  5. ताजादम जब हो जाओगी!
    पंख हिलाती उड़ जाओगी!!
    सीख देती अच्छी बाल रचना

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  6. रे वाह, ये तितली तो बडी प्यारी है।

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  7. तितली रानी के क्या कहने...सुन्दर बाल-गीत.

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  8. ये तो बड़ी प्यारी तितली रानी है...मनभावन.

    _____________________
    'पाखी की दुनिया' में 'अंडमान में आए बारिश के दिन'

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  9. ख़ूबसूरत चित्र के साथ उम्दा प्रस्तुती! तितली बहुत प्यारी होती है और सबके मन को भाति है!

    जवाब देंहटाएं

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