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04 मई, 2010

"सुमन हमें सिखलाते हैं" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक)

“शिक्षाप्रद बाल-कविता”


काँटों में पलना जिनकी,
किस्मत का लेखा है।
फिर भी उनको खिलते,
मुस्काते हमने देखा है।।

कड़ी घूप हो सरदी या,

बारिस से मौसम गीला हो।
पर गुलाब हँसता ही रहता,
चाहे काला, पीला हो।।

ये उपवन में हँसकर,
भँवरों के मन को बहलाते हैं।
दुख में कभी न विचलित होना,
सुमन हमें सिखलाते हैं।।

(चित्र गूगल सर्च से साभार)

8 टिप्‍पणियां:

  1. waqy me soch nahi tha ki fulo ke bare me itna sundar tarike se likha ja sakta he

    badhai aap ko

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  2. सुंदर गीत...शास्त्री जी धन्यवाद

    जवाब देंहटाएं
  3. ये उपवन में हँसकर,
    भँवरों के मन को बहलाते हैं।
    दुख में कभी न विचलित होना,
    सुमन हमें सिखलाते हैं।।
    बहुत खूब !!

    जवाब देंहटाएं
  4. waah ji waah..........bahut sundar tarike se itni sundar baat kah di.

    जवाब देंहटाएं
  5. बहुत सुन्दर सीख...कष्टों में भी मुस्कुराने की शिक्षा देती बहुत अच्छी रचना

    जवाब देंहटाएं
  6. रंग बिरंगे फूलों से सुसज्जित आपने बहुत ही सुन्दर शिक्षा दिया है! बेहद ख़ूबसूरत रचना!

    जवाब देंहटाएं

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