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02 दिसंबर, 2013

"काला कागा" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मेरी बालकृति नन्हें सुमन से

एक बालकविता "काला कागा"
crow_11jpgरंग-रूप है भूरा-काला। 
लगता बिल्कुल भोला-भाला।। 
housecrowjpgजब खतरे की आहट पाता। 
काँव-काँव करके चिल्लाता।। 
IMG_2031small Copyउड़ता पंख पसार गगन में। 
पहुँचा बादल के आँगन में।। 
crow2031JPGशीतल छाया मन को भायी। 
नाप रहा नभ की ऊँचाई।। 


चतुर बहुत है काला कागा।
किन्तु नही बन पाया राजा।।

पितृ-जनों का इससे नाता।
यह दुनिया को पाठ पढ़ाता।।

काक-चेष्टा जो अपनाता। 
धोखा कभी नहीं वो पाता।

3 टिप्‍पणियां:

  1. बढ़िया प्रस्तुति-
    आभार गुरुवर

    जवाब देंहटाएं
  2. आपकी इस उत्कृष्ट रचना की चर्चा कल मंगलवार ३ /१२ /१३ को चर्चामंच पर राजेश कुमारी द्वारा की जायेगी आपका वहाँ हार्दिक स्वागत है

    जवाब देंहटाएं

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