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04 जून, 2011

"घर भर की तुम राजदुलारी" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


प्यारी-प्यारी गुड़िया जैसी,
बिटिया तुम हो कितनी प्यारी।
मोहक है मुस्कान तुम्हारी,
घर भर की तुम राजदुलारी।।

नये-नये परिधान पहनकर,
सबको बहुत लुभाती हो।
अपने मन का गाना सुनकर,
ठुमके खूब लगाती हो।।
निष्ठा तुम प्राची जैसी ही,
चंचल-नटखट बच्ची हो।
मन में मैल नहीं रखती हो,
देवी जैसी सच्ची हो।।

दिनभर के कामों से थककर,
जब घर वापिस आता हूँ।
तुमसे बातें करके सारे,
कष्ट भूल मैं जाता हूँ।।

मेरे घर-आगँन की तुम तो,
नन्हीं कलिका हो सुरभित।
हँसते-गाते देख तुम्हें,
मन सबका हो जाता हर्षित।।

14 मार्च, 2011

"मैं हूँ आप सबकी प्यारी प्राची"


आज 14 मार्च है!
यानि मेरी 6वीं वर्षगाँठ!
इस अवसर पर मेरे परिवार ने मिलकर
भारतीय संस्कृति के अनुसार
मेरा जन्मदिवस मनाया!
सबसे पहले आम के लट्ठे को छीलकर
यज्ञ करने के लिए समिधाएँ बनाई गईं!
अब बाबा जी ने हवन किया! 
यज्ञ के पश्चात मैंने हाथ जोड़कर
सबको अभिवादन किया!
इस अवसर पर मेरे बहुत से दोस्त भी आये थे!
उनको मैंने जलपान भी कराया!
आधुनिकता में भी मैं किसी से कम नहीं हूँ!
मैंने भी मिल्क-केक काटा!
सबसे पहले मेरे बड़े दादा जी ने मुझे आशीर्वाद दिया!
अब बड़ी दादी जी ने मुझको तिलक किया!
मेरे प्यारे बाबा जी ने मुझे ढेर सारा प्यार करते हुए,
अपना आशीर्वाद दिया!
मेरी दादी मुझे बहुत प्यार करतीं हैं।
उन्होंने भी गिफ्ट दिया!
मेरे पापा सबसे अच्छे है!
उन्होंने भी मेरा मंगल तिलक किया!
और मम्मी जी ने भी मुझे तिलक लगाया!
 मेरे प्यारे चाचा तो मुझे सबसे ज्यादा प्यार करते है!
उन्होंने मुझे सबसे बढ़िया गिफ्ट दिया!
इस प्रकार मेरा जन्मदिन 
सबने बहुत हर्ष और उल्लास के साथ मनाया!
मैं हूँ आप सबकी प्यारी कु. प्राची

"जन्मदिन की बधाई" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

आज मेरा जन्म-दिवस है!
आज तुम्हारी वर्षगाँठ को,
मिल कर सभी मनायेंगे।
जन्मदिवस पर प्यारी बिटिया को,
हम बहुत सजाएँगे।।

मम्मी-पापा हर्षित होकर,
लायेंगे उपहार बहुत,
जो तुमको अच्छे लगते हैं,
वस्त्र वही दिलवायेंगे।

होली की पिचकारी के संग,
रंग सलोने भी होंगे,
गुब्बारे और खेल-खिलोने,
सुन्दर-सुन्दर लाएँगे।।

इष्ट-मित्र और सम्बन्धी भी,
देंगे शुभ-आषीष तुम्हें,
इस पावन वेला पर घर में,
यज्ञ-हवन करवायेंगे।

दादा-दादी की बगिया की,
तुम ही तो फुलवारी हो,
खुशी-खुशी प्यारी प्राची को,
हँस कर गले लगायेंगे।
--
मेरी पिछली वर्ष मनाई गई
सालगिरह के कुछ चित्र
बड़े दादा-दादी जी,
मेरे नन्हें दोस्त
और मेरा पूरा परिवार
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मम्मी बैठीं है, पापा गुब्बारा फुला रहे हैं!
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पापा मंगल तिलक लगा रहें हैं
और भइया प्रांजल साथ में खड़े हैं!
दादी मोबाइल कान में लगाएँ हैं
और बाबा जी आशीर्वाद दे रहे हैं!
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विनीत चाचा जी ने तो मुझे
प्यार से गोद में ही उठा लिया है!
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पीछे मेरी परदादी हैं और बनबसा से
मेरे ताऊ जी आये हैं!
मैं कितनी खुश हूँ न आज!