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01 मार्च, 2010

“मच्छर-दानी” (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)


जिसमें नींद चैन की आती।
वो मच्छर-दानी कहलाती।।
लाल-गुलाबी और हैं धानी।
नीली-पीली बड़ी सुहानी।।
छोटी, बड़ी और दरम्यानी।
कई तरह की मच्छर-दानी।।
इसको खोलो और लगाओ।
बिस्तर पर सुख से सो जाओ।।
जब ठण्डक कम हो जाती है।
गरमी और बारिश आती है।।
 
तब मच्छर हैं बहुत सताते।
भिन-भिन करके शोर मचाते।।
खून चूस कर दम लेते हैं।
डेंगू-फीवर कर देते हैं।।
मच्छर से छुटकारा पाओ।
मच्छरदानी को अपनाओ।।

12 टिप्‍पणियां:

  1. आपको तथा आपके परिवार को होली की शुभकामनाएँ.nice

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  2. मयंक जी एक रंगदानी की भी व्‍यवस्‍था कीजिए
    या तो उसमें रंग भरे हों
    या सभी मन रंग से रंगे हों
    मच्‍छर कथा मैं सुनाता हूं
    एक युवा उत्‍साही युवा मच्‍छर घर लौटा तो उसके मच्‍छरबाप ने पूछा कैसा रहा सफर, बोला बहुत सुंदर सब मुझे देख कर खूब उछल भाग कर तालियां बजा रहे थे। निश्चित मच्‍छर बहुत खुश था बचने पर। पर मच्‍छरबाप ने चैन की सांस ली, उसके बेटे के उपर से खतरा जो टल गया।

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  3. मछारों से बचने का सन्देश देती अच्छी बाल कविता...
    होली की शुभकामनायें

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  4. बहुत बढिया .. सपरिवार आपको होली की अनेको शुभकामनाएं !!

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  5. macchhar raja mujhe mat khana
    raato ke sipahi..kahi aur jana..

    bhi-bhi karega to lagaungi 4 dande..
    bulangi macchhardani..bhagungi tujhe..

    shastri ji aapki rachna se utsahit hokar ye lines likh payi.

    badhayi aapki rachna k liye.
    happy holi.

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  6. अच्छा संदेश!


    ये रंग भरा त्यौहार, चलो हम होली खेलें
    प्रीत की बहे बयार, चलो हम होली खेलें.
    पाले जितने द्वेष, चलो उनको बिसरा दें,
    खुशी की हो बौछार,चलो हम होली खेलें.


    आप एवं आपके परिवार को होली मुबारक.

    -समीर लाल ’समीर’

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  7. जय हो शास्त्री जी
    आनंद आ गया

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