यह ब्लॉग खोजें

फ़ॉलोअर

17 मार्च, 2010

"मच्छर-दानी" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)


जिसमें नींद चैन की आती।
वो मच्छर-दानी कहलाती।।

लाल-गुलाबी और हैं धानी।
नीली-पीली बड़ी सुहानी।।

छोटी, बड़ी और दरम्यानी।
कई तरह की मच्छर-दानी।।

इसको खोलो और लगाओ।
बिस्तर पर सुख से सो जाओ।।

जब ठण्डक कम हो जाती है।
गरमी और बारिश आती है।।

तब मच्छर हैं बहुत सताते।
भिन-भिन करके शोर मचाते।।

खून चूस कर दम लेते हैं।
डेंगू-फीवर कर देते हैं।।

मच्छर से छुटकारा पाओ।
मच्छरदानी को अपनाओ।।

7 टिप्‍पणियां:

  1. वाह शास्त्री जी कोई जवाब नही...बहुत बढ़िया गुनगुनाती हुए सुंदर कविता...बधाई

    जवाब देंहटाएं
  2. बहुत बढ़िया...मच्छरदानी की उपयोगिता!

    जवाब देंहटाएं
  3. जिसमें नींद चैन की आती।
    वो मच्छर-दानी कहलाती।।
    --
    वर्तमान में इससे सच्ची बात
    कोई दूसरी तो हो ही नहीं सकती!

    जवाब देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।